श्रीधन्या सुरेश
वायनाड के जंगलों से 4 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाने वाली और गरीबी से संघर्ष करने वाली श्रीधन्या सुरेश ने अब केरल के कासरगोड जिले के कलेक्टर का पद संभाल लिया है। कुरिचिया आदिवासी समुदाय से आने वाली और 2018 की UPSC परीक्षा में देशभर में 410वीं रैंक हासिल करने वाली श्रीधन्या केरल की अनुसूचित जनजाति वर्ग की पहली महिला जिला कलेक्टर बन गई हैं।
वायनाड की पोजुथाना पंचायत की एक छोटी-सी आदिवासी बस्ती में श्रीधन्या का बचपन बीता। उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर थे। पिता सुरेश रोज मजदूरी करते थे, जबकि मां कमला रोजगार गारंटी योजना के तहत काम करती थीं। स्कूल जाने के लिए श्रीधन्या को रोज करीब 4 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। पैरों में चप्पल तक नहीं होती थी, लेकिन आंखों में पढ़ाई की जबरदस्त ललक थी। माता-पिता ने खुद अभाव झेले, लेकिन बच्चों की पढ़ाई में कभी रुकावट नहीं आने दी।
सरकारी स्कूल से मलयालम माध्यम में पढ़ाई करने वाली श्रीधन्या ने प्राणीशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इसके बाद एक सरकारी अधिकारी का लोगों पर प्रभाव देखकर उन्होंने सिविल सेवा में जाने का सपना देखा। पहली कोशिश में असफलता मिली, लेकिन वह निराश नहीं हुईं। 2018 में उन्होंने दोबारा पूरी मेहनत के साथ परीक्षा दी और लिखित परीक्षा में सफलता हासिल की। हालांकि, असली परीक्षा अभी बाकी थी। इंटरव्यू के लिए दिल्ली जाने के लिए उनके परिवार के पास पैसे ही नहीं थे। आखिरकार, इस जिद्दी लड़की का सपना अधूरा न रह जाए, इसके लिए उनके दोस्तों और कुछ शुभचिंतकों ने अपनी जेब से पैसे जुटाए। महज 40 हजार रुपये लेकर और उधार व मदद के सहारे श्रीधन्या दिल्ली इंटरव्यू देने पहुंचीं।
आखिर उनकी मेहनत रंग लाई। 2018 की UPSC परीक्षा में उन्होंने देशभर में 410वीं रैंक हासिल की। वह कुरिचिया आदिवासी समुदाय से आईएएस बनने वाली केरल की पहली व्यक्ति बनीं। 2019 बैच की IAS अधिकारी बनने के बाद उन्होंने कोझिकोड, पेरिंथलमन्ना, खाद्य सुरक्षा विभाग और पर्यटन विभाग में सेवाएं दीं।
सितंबर 2026 में श्रीधन्या के करियर में एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ा। केरल सरकार ने उन्हें कासरगोड का जिला कलेक्टर नियुक्त किया। 16 सितंबर 2026 को उन्होंने पदभार संभाला और केरल में अनुसूचित जनजाति समुदाय से जिला कलेक्टर बनने वाली पहली महिला होने का गौरव हासिल किया।
वायनाड की कीचड़ भरी पगडंडियों पर 4 किलोमीटर पैदल चलने वाली वह छोटी-सी लड़की आज पूरे जिले की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रही हैं। श्रीधन्या सुरेश की यह कहानी सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि देश के करोड़ों गरीबों और सपने देखने वाले युवाओं के लिए उम्मीद की एक मजबूत किरण है।
